उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में LGBTQ+ Community का क्या हाल है ?कहा से शुरू किया जाए ? – AIQA

उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में LGBTQ+ Community का क्या हाल है ?कहा से शुरू किया जाए ?

भारतेन्दु विमल दुबे ( उमंग )

उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में LGBTQ+ Community का क्या हाल है ?कहा से शुरू किया जाए ? मोटे तौर पर समझे तो LGBTQ+ Community मतलब ऐसे लोग जो विषम लैंगिक ( Heterosexual ) नहीं है । आज तक आप लोग केवल पुरुष – महिला ही जानते रहे होंगे तो यही पुरुष – महिला विषमलैंगिक कहलाते है; नाम से ही स्पष्ट है कि ऐसे लोग जिन्हें दूसरे लिंग में दिलचस्पी हो .. लेकिन इस दुनिया मे, इस भारत मे, इस उत्तर प्रदेश में ऐसे बहुत मतलब बहुत सारे लोग है जो इस खाँचे में नहीं बैठते है, प्रायः इन्हें सयुंक्त रूप से LGBTQ+ Community कहा जाता है । L – समलैंगिक महिला ( Lesbian ), G – समलैंगिक पुरुष ( Gay ), B – द्विलिंगी/उभयलिंगी ( Bisexual ), T – Transgenders, Q – Queer आदिवैसे तो लगभग पूरे भारत मे LGBTQ+ Community की स्थिति संतोषजनक नहीं है लेकिन उत्तर प्रदेश या यूं कहें तो पूरे उत्तर भारत मे स्थिति और दयनीय है । जब यहाँ किसी के यहाँ लड़की पैदा होने पर मातम छा जाता है, किसी के 2 लड़कियां व 1 लड़का हो और कोई पूछे कि आपके कितने संतान है तो लोग 1 ही बताते है, फैलाने के तो एक ही लड़का है, जैसे कि मानो लड़कियों की गिनती ही नहीं है । इतने कानून आदि के बाद भी भ्रूण जाँच और कन्या भ्रूण हत्या जारी है । जन्म से ले के ही लड़का – लकड़ी के बीच में भेदभाव शुरू हो जाता है ।घर – बाहर किसी भी फैसले में औरतो का राय नहीं लिया जाता है और अगर कोई औरत राय दे तो उसे घरेलू हिंसा का शिकार होना पड़ता है । इसके पीछे कई कारण है

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।पंचायत में 33% महिलाओं को आरक्षण मिला है लेकिन महिलाओं का बिल्कुल नहीं चलता है, आपने “प्रधान पति” शब्द सुना ही है और अगर कोई महिला खुद काम करना चाहे तो उसे तरह तरह के प्रताड़ना सहन पड़ता है ।महिलाओं को दबाने के लिए दहेज प्रथा, पर्दा प्रथा और ना जाने क्या क्या व्यवस्थाएं की गई है । सबसे बड़ी विडंबना यह है कि अगर कोई इन भेदभावों के खिलाफ आवाज उठाता है तो ये महिलाएं ही उस आवाज के खिलाफ खड़ी हो जाती है ।अब आप खुद सोचिए कि जब यहाँ समाज जिन महिलाओं, लड़कियों को Normal व Natural कहता है, जब उनको ही इतना सब झेलना पड़ता है तो फिर समाज जिन्हें Abnormal व UnNatural कहता है, उनकी स्थिति क्या होगी ?वैसे हमे नहीं भूलना चाहिए कि अधिकांश Lesbians आदि तमाम कारणों से यहाँ Hetero की तरह ही रहती है तो इसीलिए हमे LGBTQ+ Community की स्थिति जानने से पहले समाज मे महिलाओं व विभिन्न वंचित वर्गों की स्थिति अवश्य जान लेनी चाहिए । कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं है, अगर हम अपने घर, सगे संबंधियों व आस पास ही देखे तो हमे सच्चाई मालूम हो जाएगी । हर पहुँच वाला इंसान/वर्ग अपने से कम पहुँच वाले दूसरे इंसान/वर्ग को दबाने में व्यस्त है ।सोचिए, जहाँ लड़कियों पर पुरुषों के द्वारा इतने सारे प्रतिबंध लादे गए है, उनके साथ इतने तरह का भेदभाव होता है; वहीं अगर कोई लड़की कह दे कि वह Lesbian है या Bisexual है तो फिर उसके साथ होने वाले भेदभावों आदि का दायरा बढ़ जाएगा । उसे महिलाओं का विरोध भी झेलना पड़ेगा । एक कमजोर वर्ग “महिला” अपने से कमजोर वर्ग “Lesbians, Bisexuals” को प्रताड़ित करने से नहीं चुकेगी । आप समझ रहे है ना कि हम क्या कहना चाह रहे है ?सोचिए जहाँ लड़की के पैदा होने पर इतना गमगीन मौहाल हो जाता है, अगर वहाँ कोई 3rd Gender पैदा हो जाए तो क्या ही होगा ? मैंने बड़े बड़े डिग्रीधारी लोगो को लड़कियों को वस्तु, बोझ समझते देखा है । मैंने बड़े बड़े घरो के लोगो को अपने घर जन्मे Transgender को घर से बेदखल करते देखा है ।और तो और , इतना दबाने के बाद जब कोई Trans आत्महत्या करने के बजाए ताली बजा के जीवनयापन करता/करती है तो ये समाज उन्हें उल्टा सीधा कहता है, जाओ कमा के खाओ । लेकिन कैसे ? क्या समाज / सरकार ने इन्हें पढ़ने दिया ? क्या सिस्टम ने इनके नौकरी आदि के लिए कोई व्यवस्था की है ?इतने प्रताड़ना के बाद भी जब कई Trans लोग मेयर आदि बन गए तो सिस्टम ने दाँव पेंच के जरिए, उनका निर्वाचन ही रद्द करवा दिया । जो लोग मानवाधिकारों पर बड़ी बड़ी बातें करते है, मैंने उन्हें भी महिलाओं व LGBTQ+ Persons को कुचलते देखा है ।एक तरफ Hetero पुरुष महिलाओं का शोषण करते है तो दूसरे तरह पुरुष, महिला सभी मिल के Gay लोगो का शोषण करते है । मुझे समझ नहीं आता है कि महिलाएं LGBTQ+ Community का शोषण करते हुए, अपने ऊपर हुए अत्याचारों को भूल जाती है ?LGBTQ Community के अंदर भी देखा जाए तो Gay लोग Lesbian लोग नीचा दिखाते है; Bisexuals कहते है कि मैं इन सब के लिए क्यो बोलू ? मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता , मैं Hetero की तरह रह सकता हूँ, मैं लड़की से विवाह कर लूंगा । Top , Bottoms को हीन भावना से देखते है । ये सच्चाई है कि हर इंसान/वर्ग शोषण करने के लिए अपने से कमजोर इंसान/वर्ग खोज ही लेता है ।सोचिए जहाँ लोगो को महिलाओं से रेप साधारण घटना लगती है, लोग बलात्कार के आरोपी/अपराधी के पक्ष में खड़े हो जाते है; जहाँ इतने कानून होने के बाद महिलाओं को न्याय नहीं मिल पाता है … वहाँ तो हम से कोई भी यह सोच ही नहीं पाता है कि “Gay के साथ भी रेप” हो सकता है/ होता है तो फिर समलैंगिक पुरुषों को खाक न्याय मिलेगा ?अच्छा, क्या आपने आज तक कभी सोचा था कि ( Gay, Bisexual + ) पुरुषों के साथ भी रेप हो सकता है ? अगर पुरुष के साथ रेप हो तो उससे निपटने के लिए कोई “तंत्र” है क्या ?क्या आपने आज तक कभी सोचा है कि पुरुषों को भी पीरियड आ सकता है ? वैसे भी महिला या पुरुष, किसी को भी पीरियड आए तो इसमें छिपाने जैसा क्या है ? ये बिल्कुल सामान्य व प्राकृतिक घटना है ।अब आप खुद सोचिए, जब इतने कानून, आरक्षण, उपाय, जागरूकता कानून, चुनावी मुद्दे/घोषणाओं आदि के बाद भी महिलाओं, दलितों व दूसरे कमजोर वर्गों के साथ इतना भेदभाव होता है, जब इन्हें इतना प्रताड़ित किया जाता है, जब इनकी स्थिति इतनी दयनीय है तो फिर आप LGBTQ+ Community के स्थिति के बारे में कल्पना कर ही सकते है, जिनके लिए कोई कानून, आरक्षण आदि नहीं है । LGBTQ+ Community चुनावी मुद्दों, घोषणाओं में भी शामिल नहीं है ।हम महिलाओं, दलितों, LGBTQ+ Community या किसी को भी कमजोर नहीं मानते है । सोचिए जब कदम कदम पर भेदभाव, प्रताड़ना मिलने के बाद भी आज ये लोग बड़े बड़े मुकाम हासिल कर रहे है तो अगर भेदभावों व प्रताड़ना को खत्म कर दिया जाए, तब तो ये लोग और बड़े बड़े मुकाम हासिल करें । LGBTQ+ के लोग कई देशों के प्रमुख (PM, राष्ट्रपति आदि) तक बन चुके है, भारत में भी LGBTQ+ Persons MLA, मेयर आदि बन चुके है । अंत में आप सभी से निवेदन है कि अगर आप किसी की मदद/सहयोग नहीं कर सकते है, आगे नहीं बढ़ा सकते तो कम से कम किसी को पीछे तो ना ठकेले ।एक बात और जब हम सभी लोग आगे बढ़ेंगे तो ही हमारा उत्तर प्रदेश, भारत व पूरी दुनिया आगे बढ़ेगी । आगे बढ़ने के लिए महिलाओं, LGBTQ+ Community सभी का बढ़ना जरूरी है । सोचिए, अगर आपके घर के केवल पुरुष स्वस्थ रहे तो क्या आपका पूरा परिवार स्वस्थ्य कहलाएगा ? सोचिए, अगर कोरोना वैक्सीन केवल Hetero पुरुषों को लगे तो क्या Hetero पुरुष भी कोरोना से सुरक्षित हो पाएंगे ?

Writer – भारतेन्दु विमल दुबे ( उमंग )Source – Writer Lives In Uttar Pradesh, Google Search, Ground Reports

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